आईपीएल 2020 पर मंडरा रहे मैच फिक्सिंग के काले बादल!

आईपीएल 2020 पर मंडरा रहे मैच फिक्सिंग के काले बादल!

हमेशा की तरह इस बार भी खेल के महारथियों ने आईपीएल में मैच फिक्सिंग को लेकर चिंता जताई है। हालांकि, बीसीसीआई यानी की भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की एंटी करप्शन यूनिट (एसीयू) के हेड, अजीत सिंह ने चिंता ना करने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा, कि इस साल बायो सिक्योर माहौल के कारण आईपीएल का मैच सुरक्षित होगा और इसके लिए कोई खास इंतजाम करने की जरूरत भी नहीं है। कोरोना महामारी के कारण इस बार आईपीएल के शुरूआत 19 सितंबर से यूएई में हो चुकी है। इस साल कोरोनावायरस महामारी से रोकथाम की व्यवस्था के बीच आईपीएल खिलाड़ियों के आस- पास पहुंचना बिल्कुल भी आसान नहीं है। कोरोनावायरस  की वजह से  यूएई में  आईपीएल 2020  बायो बबल में खेला जा रहा है,  तो ऐसे में किसी  बाहरी व्यक्ति से  खिलाड़ियों का  सीधा संपर्क और सट्टेबाजी या किसी भी अन्य प्रकार की फिक्सिंग बेहद मुश्किल है। लेकिन इसके बावजूद मैच फिक्सिंग का साया मंडराना शुरू हो गया है। 

हाल ही के एक खबर आई है, कि बाहर से कोई एजेंट ने आईपीएल के खिलाड़ियों से मैच फिक्सिंग को लेकर संपर्क साधा है। हालांकि फिलहाल इसकी कोई जानकारी नहीं मिली है, कि यह खिलाड़ी कौन है लेकिन इस बात की सत्यता यह है, कि उस खिलाड़ी ने इस बात की जानकारी बीसीसीआई के एंटी करप्शन यूनिट को जरूर दे दी है। हालांकि अजीत सिंह जो कि बीसीसीआई के एंटी करप्शन यूनिट के प्रमुख हैं, उन्होंने इस बात की पुष्टि की है और बताया है कि आईपीएल के किसी एक खिलाड़ी से कोई अनजान व्यक्ति ने मैच फिक्सिंग को लेकर संपर्क करने की कोशिश की है। फिलहाल हम उस एजेंट का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं, इसमें कुछ समय लगेगा। बीसीसीआई के एंटी करप्शन यूनिट के प्रमुख अजीत सिंह ने यह भी कहा कि, एंटी करप्शन प्रोटोकॉल के अनुसार आईपीएल के उस खिलाड़ी के बारे में फिलहाल किसी को बताया नहीं जा सकता है, जिससे फिक्सिंग को लेकर संपर्क साधने की कोशिश की गई है। 

क्या है मैच फिक्सिंग

आज के समय में मैच फिक्सिंग बहुत ही आम बात है  आजकल क्रिकेट या अन्य मशहूर खेलों में मैच फिक्सिंग का नाम या खिलाड़ियों पर मैच फिक्सिंग के आरोप लगना कोई नई बात नहीं है। मैच फिक्सिंग और स्पॉट फिक्सिंग में ज्यादा का फ़र्क नहीं है।  मैच फिक्सिंग में खिलाड़ी सीधे मैच के निर्णय को प्रभावित करते हैं या कोई भी खिलाड़ी जानबूझकर अपने हुनर को कम प्रदर्शित करता है ताकि उसका फायदा विरोधी टिमो को  मिल सके, खासकर जब मैच में बेहद कांटे का टक्कर हो रहा हो तब एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी भी निर्णय को पलट सकता है। 

 स्पॉट फिक्सिंग करके कोई भी खिलाड़ी या टिम मैच के निर्णय को तो प्रभावित नहीं करते। लेकिन, फिर भी वह बुकि से पैसे कमा लेते हैं। इसमे कुछ इस प्रकार होता है,की गेंदबाज अपने 1 ओवर में जानबूझकर नो बॉल या वाइट बॉल फेंक देता है या फिर कोई बल्लेबाज किसी एक ओवर में कोई रन नहीं बनाता है या कप्तान कुछ ऐसे फैसले कर लेता है, जो पहले से ही फिक्स किए जा चुके हैं। आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग का मामला पहली बार 2012 में सामने आया था। जब एक टीवी चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन में 5 खिलाड़ियों को स्पॉट फिक्सिंग करने के बदले पैसे लेने की बात कबूली थी। हालांकि, इसके बाद बीसीसीआई ने इन सभी पर हर प्रकार की क्रिकेट से प्रतिबंध कर दिया था।

खिलाड़ियों से मिलना तो मुश्किल लेकिन साधा जा सकता है ऑनलाइन संपर्क

बीसीसीआई के एंटी करप्शन यूनिट के प्रमुख, अजीत सिंह ने क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएन क्रिकइंफो से इस बात की जानकारी दी है, कि इस बार कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता, कि इस साल आईपीएल 2020 टूर्नामेंट पूरी तरह सुरक्षित नहीं है, क्योंकि एंटी करप्शन के मुताबिक इस साल आईपीएल पहले से कई गुना ज्यादा सुरक्षित माहौल में होगा, क्योंकि इस साल बायो सिक्योर माहौल के कारण टीम, सपोर्ट स्टाफ और बाहरी लोगों के बीच संपर्क में नहीं आ पाएंगे। लेकिन बीसीसीआई के एंटी करप्शन यूनिट का यह भी मानना है कि हो सकता है, खिलाड़ी बायो बबल सुरक्षा में होने के बावजूद ऑनलाइन माध्यम से खिलाड़ियों को मैच फिक्स करने की पेशकश की जाए और उनका यह अनुमान एक तरह से सही भी रहा, क्योंकि हाल ही में एक खबर के मुताबिक आईपीएल के खिलाड़ी को मैच फिक्सिंग के लिए सामने से पेशकश मिली, लेकिन उस खिलाड़ी ने तुरंत एंटी करप्शन यूनिट को इस बारे में जानकारी दे दी।

बायो सिक्योर तोड़ने पर मिलेगी सजा

19 सितंबर से यूएई में आईपीएल 2020 मैच की शुरुआत हो चुकी है। इस बार आईपीएल मैच 53 दिनों का होने वाला है। जहां 8 टीमों के बीच 60 मैच खेले जाएंगे और यह सभी मैच यूएई के 3 स्टेडियम दुबई, अबू धाबी और शारजाह मे खेले जा रहे हैं। बीसीसीआई के एंटी करप्शन यूनिट के अधिकारी पैरोल पर है और वे खिलाड़ियों पर अपनी पैनी नजरें गड़ाए हुए हैं। उनका कहना है, की यदि जरूरत पड़ी तो हम निगरानी के लिए और भी ज्यादा अधिकारी नियुक्त करेंगे या अगर अधिक आवश्यकता हुई तो हम आईसीसी से भी मदद ले सकते हैं। बीसीसीआई एंटी करप्शन यूनिट का फरमान है, कि जो खिलाड़ी या स्टाफ  बायो सिक्योर माहौल तोड़ेगा उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और सजा भी दी जाएगी।

बीसीसीआई एंटी करप्शन यूनिट को अपने द्वारा की गई तैयारी पर पूरा भरोसा

आईपीएल 2020 के दौरान बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट के माध्यम से खेल को सही और सुरक्षित बनाने के लिए खिलाड़ियों को ऑनलाइन काउंसलिंग सेशन दिया जा रहा है। आईपीएल में अंडर-19 टीम से खेल रहे खिलाड़ियों को भी सभी तरह से प्रोटोकॉल की जानकारी दी गई है। ऐसे में बीसीसीआई की एंटी करप्शन यूनिट को अपने द्वारा की गई तैयारियों पर पूरा भरोसा है और साथ ही अजीत सिंह का यह भी मानना है, कि इस साल आईपीएल 2020 के खिलाड़ियों को स्पेशल सुरक्षा की आवश्यकता नहीं है।

इससे पहले भी आईपीएल मैच फिक्सिंग का मामला सामने चुका है 

2013 में हुए आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट के पैनल ने काफी महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए, चेन्नई सुपर किंग और राजस्थान रॉयल्स पर 2 साल का बैन लगा दिया था और उसके साथ ही पैनल ने चेन्नई सुपर किंग के पूर्व अधिकारी गुरुनाथ मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के सह मालिक राज कुंद्रा को सट्टेबाजी में शामिल बताते हुए उन्हें भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के सभी क्रिकेट गतिविधियों में हिस्सा लेने पर आजीवन बैन लगा दिया था और साथ ही दोनों व्यक्ति को इसके अलावा हर तरह की क्रिकेट गतिविधियों से 5 वर्षों के लिए अलग से प्रतिबंध किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई के अध्यक्ष एन श्रीनिवासन को स्पॉट फिक्सिंग की जांच पूरी होने तक अध्यक्ष पद से हटा दिया था। इस मामले में चेन्नई सुपर किंग पर 2 साल की पाबंदी तथा राजस्थान रॉयल्स पर भी 2 साल की पाबंदी लगाई गई थी। यह पहला मौका था जब किसी खेल में फिक्सिंग को लेकर इतना बड़ा कदम उठाया गया था। 

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